“What is Real Love..?”

प्यार, मोहब्बत! मोहब्बत के बिना जिंदगी तो कुछ भी नही, जिंदगी का दूसरा नाम ही मोहब्बत हैं।  हम सब आज कुछ भी कर रहे हैं, मोहब्बत के लिए ही कर रहे है।   क्योंकि हम एक दूसरे से मोहब्बत कर रहे हैं।  हर किसी को अपनी मोहब्बत का इज़हार करने के लिए February month का इंतजार नही करना चाहिए। मुझे तुमसे मोहब्बत हैं ये कहने के लिए किसी time, month, year,  day, night, की जरूरत नही हैं| February month तो Love festival हैं यार ! मुझे खुशी है की February month love festival को हमारे इंडिया में लोग फॉलो करते हैं।  मुझे ऐसा लगता है की हर religions का अपना अलग अलग festival होता हैं।  तो प्यार का भी होना चाहिए और इसमें कोई गलत बात नहीं हैं। This is my point of view!

अब हम बात करेंगे सच्चा प्यार क्या हैं? कुछ लोग बोलते हैं, मैंने उसे पहली बार देखा और  एक नजर मे प्यार  उससे  प्यार हो गया।  यह सब बोलने की बात हैं।  सच्चे प्यार को होने में वक़्त लगता हैं।  Attraction ,crush, feelings, lust, attachment  यह सारी चीज़े प्यार नहीं हैं। यह सारी चीज़े वक़्त के साथ बदल जाती हैं। लेकिन एक सच्चा प्यार कभी नहीं बदलता true love never die! दो लोग साथ में मोहब्बत में  हैं और दोनों लोगों की सोच मिलती जुलती हैं, तब तक ठीक हैं।  जहा पर एक थोड़ा अलग सोचने लगा  वहा  लड़ाई झगड़े होने लगते हैं।  बस इसी तरह लोग प्यार करते हैं और इसी को प्यार समझते हैं।  imagination कर रहे होते है की, ऐसा लाइफ पार्टनर चाहिए और ऐसा कोई सामने आ जाए तो बस attraction ,crush, feelings, lust, attachment  हो जाती हैं।  किसी के लम्बे बाल अच्छे लगते हैं,  किसी की गोरी चमड़ी अच्छी लगती हैं, किसी की स्माइल अच्छी लगती हैं, किसी की हाईट अच्छी लगती हैं,  लेकिन यह  सब एक  वक्त  मे  ख़तम हो जाता है। ऐसा प्यार ऐसी फीलिंग्स ! 

 बिल्ली दिन भर चूहे के बारे में सोचती रहती हैं, इसलिए सोचती हैं,  क्योंकि बिल्ली को चूहे से मोहब्बत हैं ऐसा नहीं उसे अपनी भूख  मिटानी हैं।  बस इसी तरह लोग अपने भूख को मिटाना चाहते हैं।  फिर क्या होता हैं जहा रिश्ते जरूरत से बनते हैं टूट जाते हैं। 

उसके बाल अच्छे लगना, उसकी गोरी चमड़ी अच्छी लगना, उसकी हाईट अच्छी लगना, उसकी मुस्कुराहट अच्छी लगना, उसकी बॉडी अच्छी लगना यह सारी चीज़े एक ज़रूरत ही तो हैं।  इस तरह के प्यार में लोग boar हो जाते हैं बहुत जल्दी relationship को खत्म कर देते हैं। 

                सच्चे प्यार की शुरुआत खुद से होती हैं। अगर आप किसी से मोहब्बत करते हैं, उसे देखते ही आपको ऐसा लगे की आप उसमे खुद को देख रहे हैं, तो आप कह सकते हैं की, आप मोहब्बत में हैं।  जब किसी से सच्चा प्यार हो जाता है तो इंसान उसमे अपने आपको देखता हैं।  उसको खुद से अलग नहीं समझता।  इंसान अपने आपसे तो कभी boar  नही होता और सच्चे प्यार की फीलिंग्स कभी खत्म नही होती।  हम उसे रोज़ देखें तो भी ऐसा लगता है बस पहेली बार देख रहे है।  जहां ‘तू’  हैं, में ‘हूं ‘वहां मोहब्बत नहीं हैं, जहा सिर्फ हम हैं, वहां मोहब्बत है। 

         माँ  के केस में भी ऐसे ही होता हैं, माँ बोलती हैं ये मेरा बेटा हैं,  ये मेरी बेटी है, लेकिन माँ के लिए वो मेरा नहीं हैं, वो में हू! माँ  सिर्फ ऐसा बोलती है!  सच में तो माँ अपने बच्चों में खुदको देखती है। माँ बोलती है ना, मुझे कुछ भी हो जाए मेरे बच्चों को कुछ नही होना चाहिए; बस यहीं प्यार हैं। माँ भी अपने बच्चों से कभी boar नहीं होती।  सच्चे प्यार की शुरुआत खुद से होती हैं, फिर वो माँ हो या आपसे मोहब्बत करने वाला कोई इंसान। जहां लोग तुम्हें खुद से अलग समझते है, वहा  मोहब्बत नही है।   जो लोग आपसे सच्चा प्यार करेंगे वो तुम्हें अलग नहीं मानेंगे, वो तुम्हें अपना ही वजूद का हिस्सा मानेंगे।  यही मेरी नज़र में रियल लव हैं.

– सायमा खान

विभाग – मुंबई

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