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  •  लैंगिक भेदभाव और हिंसा
    हम एक स्वतंत्र देश मे स्थित हैं। ऐसा लोगों को प्रतीक और अनुभव होता है। कि हम खुले विचार वाले व्यक्ति है। लेकिन परिस्थितियां कुछ और ही संदर्भित करती है। आजादी के कई वर्ष बीत चुके हैं। लेकिन वास्तविकता यह है कि, आज भी हम […]
  • रानी लक्ष्मी बाई
      सुख वैभव को छोड़कर  उसने खड़ग धारी थी  जिसने अंग्रेजों को तबाह किया  एक अकेली नारी थी…… कितनी पीड़ा आयी  कितने दुःख का पहाड़ गिरा  खुद को निसहाय नहीं समझा  आगे बढ़ कर वार किया…… पवन नामक अश्व पर चढ़ वो पवन से बातें […]
  • बलात्कार पीडिता बद्दलची ‘समजवृत्ती’
    संविधानाने भारतातील सर्व नागरिकाना समान हक्क अधिकार दिले आहेत.मग ती स्त्री असो वा पुरुष.संविधान अस्तित्वात येउन आज 72 वर्षे पूर्ण झाली. तरी आजही महिला सुरक्षित नाहीत का? याला जबाबदार कोण ?…याला जबाबदार असणारी आपली समाजव्यवस्था आणि आपली मानसिकता आहे ती बदलणे खूप गरजेचं आहे. संविधानाचे […]
  • स्वतंत्र नारी….
    सर्व  संकटावर मात करून सोपा मार्ग काढणारी भूमिका                . म्हणजे नारी || कलानुकाळ  प्रत्येक क्षेत्रात छबी उठवणारी भूमिका                    म्हणजे नारी || धर्म ग्रंथ असो वा कथा संग्रह असो वा साहित्य असो             नारी शिवाय पुर्ण होणार नाहीत कधी.                              मग  !               कोण म्हणतं नारी स्वतंत्र नाही | […]
  • प्रजातंत्र के बीज बोनेवाली राजमाता- ‘माँसाहब जीजाऊ!
    गणतंत्र दिवस के इस अवसर पर प्रजातंत्र के संबंध में जो मूल्य आवश्यक होते है; उसका जिक्र करना लाज़मी है। वह मूल्य आते कहाँ से है? उनका होना कितना अहम होता है? ऐसे कई सवाल अपने आप दिमाग में आते है। और इतिहास के पन्ने […]