भारत की भारतीयता कायम रहे…

भारत एक धर्मनिरपेक्षता पर आधारित देश है, स्वतंत्र भारत की यही पहचान है। भारत का इतिहास सब लोगो ने पढ़ने की कोशिश की है, और इतिहास के अपने मंसूबे सही साबित करने के लिए कई लोगो ने तोड मोड कर बदलकर पेश करने की भी कोशिष की। हर कोई अपने नजरिये से भारत के इतिहास को देखता है।

भारत का मूलनिवासी द्रविड है, या आर्य इस पर बहुत सारे लोगों ने खोज की है, अपने अपने निष्कर्ष सामने लाये गये है। असल में सृष्टि ने मानव का निर्माण किया है और सृष्टी की सर्वश्रेष्ठ रचना मनुष्य है। मनुष्य इसलिये सर्वश्रेष्ठ है क्योंकि वे अपने दिमाग का इस्तेमाल करके अपना विकास करना जानता है। मै इतिहास के बारे मे ज्यादा लिखना नहीं चाहती क्योंकि हर किसीको अपना इतिहास खुद जानकर सही या गलत का तर्क लगाना चाहिए । मै स्वतंत्र भारत की पहचान के बारे मे बात करना चाहती हु। भारत में अनेक धर्म, अनेक भाषा, अनेक पेहराव, विविधता शामिल है विविधता में एक समानता यह है कि, हमारी एक पहचान एक जैसी है की हम सब भारतीय है।

देश आजाद हो कर आज ७३ साल  हो चुके है। आज मुस्लिम समाज मुस्लिम ही है, ख्रिश्चन- ख्रिश्चन  है, बौद्ध- बौद्ध है, हिंदू धर्म मे गट दिखाई देते है एक जो भारत का बहुजनवादी हिंदू है। जो सब भारतीय को अपना मानकर भारत की सार्वभौम एकता को सन्मान देते हुए भारत का सर्वांगिन विकास चाहता है. सभी भारतीय धर्म का एकसमान आदर करता है. सारे त्योहार मिल जुल कर मना कर खुशहाल भारत को दिखाता है।

मैने अपनी जानकारी मे जो दो हिंदुत्व देखे है; उसमे से प्रबोधन ठाकरे जी का जो हिंदुत्व है वो भारत का बहुजनो का हिंदुत्व है जो हर धर्म का सन्मान करता है. मानवी मूल्य  के आधार पर हिंदुत्व की परिभाषा करता है. जो हर भारतीय के समान हक्क की बात करता है,जिस मे किसी भी तरह की अंध भक्ती नही है कोई भेदभाव नही है । सही को सही और गलत को गलत कहने का सामर्थ्य रखता है। प्रबोधन ठाकरे जी ने हमेशा समानता के हक मे अपनी लढाई लडी है, पर उन्होने ब्राह्मणवाद का हमेशा विरोध किया है। उन्होंने जो किताबे लिखी है वह बहुत ही स्पष्टता से हिंदुत्व का ब्राह्मणी समाज ने  अपने स्वार्थ के लिये विटंबना कि है उसका विरोध करती है।  उनके किताबो मे लिखा गया है कि, हिंदू पहिले मंदिर मे भगवान नही धूंडते थे। कोई मंदिर नही होते थे। बौद्ध स्तूप और विहार पर हमला करके बौद्ध भिक्षु को मारकर बुद्ध विहार पर अतिक्रमण किया है। बुद्ध की मूर्तियों को काल्पनिक देवी-देवताओं का रूप देकर मंदिर बना दिया और वहाँ पर अंधश्रद्धा और पाखंड का स्वार्थी ब्राह्मणों के द्वारा अपने उपजीविका का साधन बनाया गया। ब्राह्मणों ने मन घडत कहानिया बनाकर अलग अलग रस्म को हिंदू समाज पर जबरदस्ती थोपा है। और अगर कोई इन की बात नही माने तो सब मिलकर उसका बहिष्कार करते है । सारे बहुजन हिंदू की आमदनी का काफी बड़ा हिस्सा इन ब्राह्मणों ने मंदिरों मे खर्चा हो ऐसे हातखंडे बनाये है । इससे बहुजनो का कोई विकास तो नहीं होता और उनका सारा धन मंदिरों के जरिये ब्राह्मणों की तिजोरी मे चला जाता है इसलिये प्रबोधन ठाकरे जी ब्राह्मणों के हिंदुत्व का समर्थन नही करते।

आर.एस.एस, भारतीय जनता पार्टी इस प्रकार का ब्राम्हणी षडयंत्र के हिंदुत्व का समर्थन करती है. जो भारत देश को एक हिंदू राष्ट्र बनाने के मनसुबे रखती है। जब कि भारत विविध धर्म का सर्वसामान्य एक देश हे। दरअसल सारे विश्व मे एक प्रवृत्ती  चल रही है कि, अलग अलग धर्म अपना वर्चस्व बनाने की कोशिश कर रहे है। जैसे ईरान मे जब इस्लाम आया पंधरा साल मे अपना वर्चस्व निर्माण करके पूरी तरह से इस्लामिक देश बना दिया। ऐसे ही पड़ोसी देश बॅबिलोन को भी सतरा सालो मे पूरी तरह से इस्लामिक बना दिया है। बस इतना ही नही इजिप्त २१ सालो मे पुरी तरह से इस्लामिक देश बन गया है । और पचास साल मे पूरा युरोप ख्रिश्चन धर्म का देश बना दिया है ।

पर भारत  मे  ८०० सालों तक मुस्लिम राज्यकर्ता ने राज्य किया है। २०० साल तक ख्रिश्चन धर्मीय ने राज किया है, फिर भी भारत की अपनी पहचान एक धर्मनिरपेक्ष देश से  विश्व भर मे प्रचलित है। भारत मे  ८३% बहुजन हिंदू समाज है। ३%  ब्राह्मणी हिंदुत्व को मानने वाला समाज है। और बाकी मुस्लिम, ख्रिश्चन, सिख, बौद्ध समाज है। ८३% बहुजन हिंदू मे प्रजातियों का बहुत बडा सहभाग है। ८३% हिंदू समाज मे एस.सी, एस.टी, ओ.बी.सी. काफी प्रजाती शामिल है, जो बहुजनवादी हिंदू है। इनमे से कुछ लोग बौद्ध हुये है, क्योंकि उन्होंने इतिहास पढा है। बाबा साहब के मार्गदर्शन में उन्होंने अपने अस्तित्व को पहचान कर बौद्ध धर्म का स्वीकार किया है । और कुछ अभी भी हिंदू है। इनमे से काफी लोग आर.एस.एस संगठन से जुड़े हुए है।और कुछ लोग ब्राह्मणी हिंदुत्व के प्रभाव मे है जो ब्राह्मण के बताये हुए मार्ग पे चलते है और बीजेपी का हिंदुत्व का अजेंडा पूरे भारत को हिंदुराष्ट्र बनाने का समर्थन करते है। ये लोग यह नहीं जानते कि इस भारत में सार्वभौमिक समानता का माहोल बिगड जायेगा।

अगर इंसान ने भारत को भारत के संविधान के अनुसार देखा तो समझ जायेंगे भारत को हिंदुराष्ट्र बनाने के अलावा बहुत सारे और भी जरूरी काम है । देश मे बेरोजगारी, शिक्षा, स्वास्थ, क्षेत्र में भारत अभी काफी पिछड़ा हुआ है। केंद्र सरकार हर सरकारी क्षेत्र को निजीकरण की और लेकर जा रही है। सारी सरकारी कामकाज निजीकरण के हवाले कर दिया जा रहे है। बहुत सारे कानून, आर्टिकल्स बदल कर मजदूरों को, किसानों को, गुलाम बनाया जाने की कोशिश की जा रही है । हमारे आजाद देश को गुलाम  बनाया जा रहा है। बहुजन हिंदू जो आर.एस.एस बीजेपी के छलावे मे आ गये है, उनको ऐसे लग रहा है की हिंदुराष्ट्र बनने से उन की हालत बदल जायेंगी, उनकी प्रगती होगी तो ऐसा कुछ होने वाला नहीं है। यहां पे सब कुछ बडे  व्यापारी और मंदिर के पुजारी इन का वर्चस्व प्रस्थापित करने की कोशिश की जा रही है। संविधान ने हम सबको  समानता का हक दिया है सब एक दुसरे से पूरक है।

सबको  राइट ऑफ इक्वलिटी है । यही बात  उच्चवर्णीय को ब्राह्मण को व्यापारियों को  बरदाश  नही हो    रही है।  इसलिये धर्मनिरपेक्ष भारत को  हिंदुराष्ट्र बनाने की कोशिश की जा रही है ।  आर.एस.एस और बीजेपी के यह इरादे अगर बहुजनवादी हिंदू समझ  जाते तो  बाबरी  मस्जिद कभी तोडी नही जाती, क्योंकि  हम अपने अस्तित्व को पहचान कर हमारे भारतीय होने का आदर करते हुए अपने घर पर रहते। ब्राह्मणी हिंदुत्व का अजेंडा चलाने वाले हिंदू का साथ नही देते और बाबरी मस्जिद नहीं तोड़ी जाती थी। क्या फरक पडता है किं वहा पर मजीद है या मंदिर है । आज देश को किस तरफ अपने कदम उठाने चाहिए हमें विकसित होने पे काम करणा चाहिये ना की आपस मे तनाव का वातावरण निर्माण करते महत्वपूर्ण  काम को नजरअंदाज करना चाहिये।

बीजेपी आर.एस.एस देश को डिवाइड एंड रूल पॉलिसी का इस्तेमाल करके आपस मे हिंदू-मुस्लिम वाद बढ़ाने की कोशिश कर रही है। चुनाव से पहले ही उन्होंने अपने मेनिफेस्टो बना लिया था जिसमें कलम ३७० रद्द करना, नागरिकता कानून मे बदलाव लाना, सारी सरकारी संस्था  का निजीकरण करना, और राम मंदिर बनाना विषय प्राथमिक और महत्वपूर्ण रखे थे । चुनाव चुनकर आने के बाद यह सारे कामों को असंवैधानिक तरीके से न्यायपालिका पर दबाव लाकर अपने सारे अजेंडे पुरे कर रहे है। हिंदू राष्ट्र बनाने के प्रयास में इतर धर्मीय पर अन्याय हो रहा है। जातिवाद को बढावा दिया जा रहा है। इन सब प्रक्रिया से भारत का आर्थिक सामाजिक नुकसान हो रहा है ।राम मंदिर बनाने से ब्राह्मण का ही व्यापार बढ़ेगा, भारतीय नागरिक को इसका कोई फायदा नही है। भारत के विकास के लिए काम होना जरुरी है।

२० नोव्हेंबर को प्रबोधनकार केशव सीताराम ठाकरे जी  की पुण्यतिथी है। इस अवसर पर भारत के बहुजन हिंदू समाज से अनुरोध है कि, आप अपने भारतीयता को प्राधान्य देते हुए ब्राह्मणी हिंदुत्व के षड्यंत्र मे ना फसकर अपने देश को विकसित होने मे अपना योगदान दीजिए । हम सब सर्वप्रथम भारतीय है ।भगवान मंदिरों मे नहीं अपने अंदर है सही गलत जानता है ।आज अपना भारत खतरे में है, उसे बेचा जा रहा है, लुटा जा रहा है, और गरीब बनाया जा रहा है, भारत की पहचान भारत की धर्मनिरपेक्षता है । हम सब सर्व प्रथम एक इन्सान है और इन्सानियत एक सर्वश्रेष्ठ धर्म है। जागो भारत जागो! अभी नही तो कभी नही!

 

~ निर्मल मानवतावादी भारतीय समाज

One thought on “भारत की भारतीयता कायम रहे…”

  1. क्या बात है बहोत खूब
    खूप छान लिहिले आहे ताई
    Hats off u

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