किसान आंदोलन…

2014 से भारत मे बीजेपी सरकार का राज चल रहा है। बीजेपी सरकार पूरी तरह से देश में लोकतंत्र की जगह राजतंत्र चला रही है। भारत देश को हिंदुराष्ट्र बनाने जा रही है। देश को हिंदू राष्ट्र मे परिवर्तन करने कीे कोशिश में बीजेपी ने भारत के कानून में कुल मिला के 104 अमेंडमेंट की है। प्रमुख 370 रद्द किया गया। CAA/NRC को लाया गया, तीन तलाक, लेबर लॉ अमेनडमेंट ओर अब किसान बिल, यह सब कानून बीजेपी सरकारने बहुमत के जोर पर असंवैधानिक रूप से लागू किया है। जिसके लिए जनता ने हमेशा विरोध किया है। लेकिन किसान आंदोलन से पहले वाले आंदोलन जैसे CAA/NRC का दिल्ली मे जो आंदोलन था, प्रोटेस्ट था, उसे शक्तिप्रदर्शन से असफल किया गया। इसी तरह से बाकी सारी आंदोलको को बीजेपी ने खत्म किया है। लेकिन किसानों का आंदोलन वह इतनी आसानी से शक्ती का इस्तेमाल करके भी बंद नही कर सकते। क्योंकि किसानों का आंदोलन आंतरराष्ट्रीय स्तर पर सारी दुनिया देख रही है। सोशल मीडिया और इंटरनेट आंदोलन से जुडा हुआ है। इसलिये बीजेपी सरकार आंदोलन को पोलीस पावर दिखा के ऐसे बंद नही कर सकते। इसलिए किसानों से बात करके इस समस्या का उपाय धुंढा जा रहा है। लेकिन बीजेपी अभी भी इस कानून को सही बता रही है। बीजेपी का कहना है कि, कानून किसान के विकास के लिए बनाया गया है। ये पूरी तरह से किसानों की हित मे है। लेकिन किसान कहता है कि यह कानून किसानों के हित मे नही है। यह कानून अदानी ओर अंबानी जैसे बड़े बड़े व्यापारियों के हित में है।

आखिर यह बिल है क्या? और इसका विरोध देशभर में क्यों हो रहा है? इसीलिए हमे यह बिल जानना भी जरुरी है।

1) स्टॉक लिस्ट फ्री कर दी गई है, सरकार का कहना है कि, किसान और व्यापारी अनाज का भंडारण कर सकते है। लेकिन किसान का कहना है की, इससे हमे कोई फायदा नही होगा। क्योंकी हम अनाज का भंडारण पहले से ही करते आ रहे है, ओर मंडी में बेचते थे। लेकिन अब व्यापारीयो को अनाज का भंडारण करने की आजादी मिलेगी और फिर अपने मर्जी के दाम से अनाज को मेहंगा बेच सकते है। जो नाही किसान को फायदा दिलाएगा और ना ही उपभोक्ता को। इसलिए यह बिल किसान नही चाहते है।

2) दुसरा बिल कॉन्ट्रॅक्ट फार्मिंग बताता है। जिसमें किसान और व्यापारियों के बीच मे कॉन्ट्रॅक्ट होगा। लेकीन इस में किसान विरोध करते है, क्योंकि वो जानते है कि, इस तरह से हम अपना पुरा अनाज कही भी बेच नही पायेंगे। और कॉन्ट्रॅक्ट दो लोगों में होता है, जो समान होते है। यहा पर व्यापारी सशक्त है और किसान उतना सशक्त नही है। अगर कॉन्ट्रॅक्ट में कोई गडबडी होती है, किसान के साथ कुछ भी अन्याय होता है। तो किसान को कोर्ट मे जाने का अधिकार भी नही है। किसान सिर्फ डी.जी.एम. के ऑफिस मे शिकायत कर सकता है। उसे वहा पर न्याय नही मिल पायेगा। इसलिए किसान इस बिल का विरोध करते है।

3) तिसरा बिल फ्री मार्केट: जिसमें सरकार कहती है कि, किसान अपना अनाज किसी भी मंडी मे बेॅच सकता है। उसे इसकी आजादी है। किसान कहता है कि, हमे अपना अनाज अपनी मर्जीसे कही भी बेचने की आजादी पहले से हासिल थी। लेकिन हम चाहते है की, सरकार हम से सरकारी मंडी के जरिये अनाज खरिदे। सरकारी मंडी बहुत जगा पर नही है। इसलिए किसान को ट्रांसपोर्टेशन का काफी खर्चा होता है। इसलिए किसान चाहता है कि, सरकारी मंडीया बढाई जाने चाहीए। क्योंकी सरकारी मंडी मे शुल्क तय किया जाता है। रजिस्ट्रेशन होता है। रेकॉर्डिंग होती है। और सरकारी कानून लागू होता है। प्रायव्हेट मंडी में यह सब नही होता है। इसलिए किसान चाहता है, एम.एस.पी. को कानूनी कर के हमे सरकारी मंडीया बना कर दी जाए। या सरकारी मंडी में हि एम.एस.पी को कानूनी करके हमारा अनाज सरकार खरीदे।

दरअसल बीजेपी सरकार का कहना है कि, हम आधुनिकता का इस्तेमाल करके किसान बिल बेहतर बनाए हुए है, और वह किसानों के हित में है। वो अमेरिका का पैटन लाना चाहते है, जब कि अमेरिका का खेती का पर्सेंटेज 11/2 % है, वहा कॉन्ट्रॅक्ट फार्मिंग होती है। लेकिन भारत कृषिप्रधान देश है। यहाँ का किसान पूरे ईमानदारी से खेती करता है, और करना भी चाहता है। किसान सरकार के साथ जुड़कर खेती करना चाहता है। इसलिए किसान अपनी आजादी नही खोना चाहता और किसानों का कहना है की, सरकारने इस बिल के बारे मे किसी भी किसान के संघटनों को, किसी भी तरह का विचार, विमर्श नही किया था। और किसी भी किसानी संघटनों ने इस बिल की मांग नही की थी। और कोई भी किसानों का संघटन इस बिल का समर्थन नही करता है। इसलिए भारत के सभी किसान इस बिल का विरोध करते है। इसलिए पंजाब, हरियाणा से किसान दिल्ली मे प्रधानमंत्री मोदी जी से बात करने के लिए दिल्ली आ रहे थे। लेकिन बीजेपी सरकार किसानों का बिल बदलना नही चाहती है। इसलिए उन्होने किसानों को दिल्ली में आने से मना कर दिया। किसान दिल्ली के बॉर्डर पे रुके हुए है। बीजेपी सरकारने आम आदमी पार्टी के चीफ मिनिस्टर श्री. अरविंद केजरीवाल जी से यह कहा था कि, दिल्ली के स्टेडियम मे किसानों को डिटेन किया जाए। और उनको बंदी बनाया जाए। ताकि आंदोलन असफल हो। लेकिन अरविंद केजरीवाल जीने ऐसा ना करते हुए, किसानों के आंदोलन का समर्थन किया है।

 

बीजेपी सरकार किसानों से बात कर रही है, लेकिन बिल वापस लेने के हित में नही है। और किसान इस बिल को रद्द करना चाहते है। किसान पीछे हटने वाले नही है, इसलिए बीजेपी सरकार आंदोलन को गलत तरीके से बदनाम कर रही है। बीजेपी के मंत्रीओं ने किसानों को आतंकवादी कहा है। तुकडे तुकडे गैंग कहा है। और विदेशी लोग इस आंदोलन को फंडिंग कर रहे है, इस तरह का आरोप लगाया गया है। किसान बहोत नाराज है, उन्होने टोल बंद करने का आंदोलन किया है। दिल्ली में प्रवेश करने की कोशिश करते है, तो पुलिस आंदोलन कर्ताओं को टारगेट करती है। पुलिस ने काफी लोगों को भीतर किया है। आंदोलन के उन्नीस वे दिन पे सभी किसानों ने उपवास रख के इस बिल का विरोध किया है। आम आदमी के सभी कार्यकर्ताओ ने भी उपवास रखा था। और देश की सभी समर्थको ने किसान आंदोलन के समर्थन में उपवास रखा था। फिर भी आज आंदोलन का 20 वा दिन है। बीजेपी सरकार बिल वापस नही लेने वाली है, ऐसा ही बोल रही है। इसलिए सभी राज्यों के किसान, मजदूर, समाज सेवक, वकील, संस्था, नागरिक मिलकर आंदोलन कर रहे है।

कोई भी कानून जनता के हित के लिए बनाया जाता है। अगर जनता किसी भी कानून का विरोध करती है, तो इसका मतलब यही है की, वो कानून गलत है। इसलिए इस कानून का रद्द होना जरुरी है। किसान पीछे नही हटेंगे। उनके परिवार भी इस आंदोलन में शामिल हो चुके है। छह महिने की पुरी तयारी के साथ किसान आंदोलन कर रहे है। और जनता भी किसानो का समर्थन कर रही है। बीजेपी सरकार अपनी बात पर अडी हुई है। सारी दुनिया का लक्ष किसान आंदोलन पर है। इसलिए अच्छा होगा कि इस आंदोलन को ध्यान में रखते हुए, प्रधानमंत्री मोदी जी और राष्ट्रपती कोविंद जी इन दोनों ने अपने विशेष अधिकार का इस्तेमाल करके इस कानून को रद्द करना चाहिये। क्योंकि भारत देश कृषि प्रधान देश है। भारत का किसान खुश होगा, तो सब खुश होंगे। सरकार जनता के लिए होनी चाहिए, व्यापारीओं के लिए नही।

~  निर्मल भारतीय मानवतावादी समाज

    विभाग-नवी मुंबई

 

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