इंसानियत को जिंदा रखने के लिये पानी की मुक्तता करनी जरूरी है!



          ‘ऐसा भारत बनाएँगे’ के पिछले पाचवे अंक में सभी युवां साथियोने ‘वेलेन्टाइन डे’ के अवसर पर प्यार पर अपनी सोच, भावनाओ को पूरे सच्चाई से खुले दिल से समाज के सामने रखा, इसीलिए हम सभी का शुक्रिया अदा करते है।


              इस बार 22 मार्च ‘विश्व जल दिन’ के अवसर पर हम सभी युवां साथियोने हमारे काफी नजदीकी मुद्दे पर मतलब ‘पानी’ के मुद्दे पर साँझी चर्चा कर के, पानी के हर अंग को समझने की कोशिश कर, उसपर एक समझदारी बनाकर, अपनी सोच और अनुभव को सभी लोगों तक पहुँचाने के लिए ‘ऐसा भारत बनाएँगे’ पत्रिका में ‘पानी’ के बारे में लिखा है।

              पानी पर लिखते हुए काफी साथियोने दूर दूर से पानी भरने के अपने संघर्ष के अनुभव लिखे, किसीने पानी अधिकार के बारे में लिखा, किस तरह से पानी का अकाल पड़े गांव में दो प्यार करने वालो के बीच पानी मुसीबत बन खड़ा होता है, किस तरह से पानी के कारन लोगो की शादी टूट जाती है, प्यासे को पानी पिलाने के संस्कृती के बारे में लिखा, पानी के महत्त्व के बारे में लिखा, किस तरह से शहर निर्माताओं को ही पानी अधिकार नकारा जाता है; या जानबूझकर पानी से वंचित रखा जाता है, किस तरह से आज आधुनिक युग मे भी धर्म के नाम पर पानी पीने की वजह से एक बच्चे की अमानवीय तरीके से मारपीट की जाती है, और कुछ साथियोने पानी बचाने (Save Water) के बारे में भी समाज मे जागरूता फैलाने के लिए लिखा।

              आज हम देख रहे है, जो पानी कुदरत हम सभी को समान दे रहा है, उस पानी पर कुछ लोग अपनी मालकियत जमा रहे है। किसीको बोहत कम या कुछ भी नही और किसी को बोहत ज्यादा तरीके से पानी बाँट रहे है। बरसो पहले उच्च-नीचता, जात-पात,धर्मभेद इस विचारों की वजह से एक तपके को पानी नकारा था। उस वक़्त पानी के लिए बडा जनांदोलन,संघर्ष हुवा और पानी हमारा मानव अधिकार है यह स्थापित हुवा था। पानी का समान बंटवारा होगा इसे अधोरेखित किया गया था। जब कि 2014 को मुम्बई हायकोर्ट ने आदेश दिया, भारतीय संविधान का अनुच्छेद 21 कहता है कि, सभी नागरिकों को सम्मानपूर्वक जीने का अधिकार है; इसीलिए सभी को सम्मान से पानी अधिकार मिलना चाहिये। फिर भी इसके बावजूद आज भी मुम्बई महानगरपालिका ने मुम्बई के 20 लाख श्रमीक नागरिकोंको पानी से वंचित रखा है। रोजाना किसीकी गाली खा कर, पानी की भिख मांग कर, पानी पीने वाले इन लोगो के सम्मान का क्या? इसके बारे में कोई सोचता नही।

               कैलिफोर्निया जैसे  राज्य मे पानी को शेयर मार्केट में कमोडिटी के रुप मे बेंचा जा रहा है, दुनिया भर में सरकार पानी के प्याऊ, फाउंटेन और आसानी से उपलब्ध होने वाले पानी के हर स्त्रोत को नष्ट कर रही है, ताकि हमे पैकेजिंग ड्रिंकिंग वाटर पे निर्भर होना पड़े। बस्ती बस्ती में पानी को पानी माफिया द्वारा बेचा जा रहा है, इस तरह से दुनिया भर में पानी का बड़ा मार्किट तैयार हो रहा है और पानी का निजीकरण जोरो शोरो से चालू है।

              आज भारत मे असिफ जैसे बच्चे को मंदिर में पानी पीने पर बेरहमी से मारा जाता है, मारने वाले लोग अपने धर्म की सुरक्षा कर रहे इस विचारो से ऐसी हरकत कर रहे है; जिन्हें पता नही होता कि प्यासे को पानी पिलाना यह हर धर्म सिखाता है।

              एक तरफ निजीकरण दूसरी तरफ आज भी जात-पात, धर्मभेद, वर्गभेद की वजह से नागरिकों को पानी से वंचित रखा जा रहा है। हमने देखा है, किस तरह से बोलिव्हिया जैसे देश मे पानी के निजीकरण की वजह से वहाँ के नागरिकों का संघर्ष युद्ध मे रूपांतरीत हुवा था। और काफी नागरिक और पोलिस प्रशासन से काफी लोगो को अपनी जान से हात धोना पड़ा था। इसीलिए हर देशों ने , नागरिकों ने पानी सबको समान मिलना चाहिए यह सबका अधिकार है, यह अपने दिल से स्वीकारना चाहिए और किसी के साथ भी पानी बँटवारा करने में किसी भी प्रकार का भेदभाव नही करना चाहिए। सरकारों ने पानी निजीकरण न करते हुए पानी को सार्वजनिक करना चाहिए। तभी सभी को पानी आसानी से उपलब्ध हो सकता है, अन्यथा वो दिन दूर नही जब दुनिया मे पानी के लिए तीसरा महायुद्ध शुरू होगा!

संपादन: विशाल जाधव, पूजा कांबळे

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