आज की Definition Of  देशभक्ति ???

वैसे तो हम सभी बचपन से स्कूल के दिनों से ही देशभक्ति के बारे मे सुनते आए है। हमारे अंदर भी यह देशभक्ति १५ अगस्त स्वतंत्र दिन और २६ जनवरी गणतंत्र दिन पर ही उत्पन्न होती है। पर बाकी के दिन हमारा और देश का कुछ संबंध नहीं होता। हमें देश के प्रति या एक जिम्मेदार नागरिक होने के कारन हमारी जो जिम्मेदारी होती है, उसे हम हमेशा ही भूल जाते है। पर घर मे बैठकर आपस में, “ये नेता सही है, और ये नेता गलत है”  इन मुद्दों पर पूरे जोरो से टिपनी करते रहते है। खैर छोड़ो ये सब! अभी २६ नवंबर “संविधान दिन” आ रहा है। हम सबको पता है, इस दिन हमारे देश  का संविधान यानी कानून पूरे देशभर लागू हुआ था। और ये संविधान बनाने के लिए जिन लोगों ने सहयोग दिया था, उन्हें हम “देशप्रेमी” या “देशभक्त” समझते है। मैं भी अबतक जिन्होंने देश के निर्माण या विकास के प्रति अपना योगदान दिया है, उनको ही देश भक्त समझता था। पर अब शायद लगता है की, आज की Definition of  देशभक्ति बदल गई है!

२०१४ मे देश से काँग्रेस सरकार चली गई। और बीजेपी सरकार पूर्ण बहुमत से चुनकर आयी। और फिर क्या? जो कुछ हम सोच भी नहीं सकते थे, वो सब हमारे साथ सबसे बड़े लोकतान्त्रिक देश मे होने लगा। हमे अब “तानाशाही” क्या होती उसकी पहचान “अच्छे से” होने लगी है। हमे राष्ट्रवाद, हिंदुराष्ट्र, आत्मनिर्भर, विकास, मन की बात, मोदी है तो मुमकिन है! ऐसी सभी झूठी बाते जोर जोर से चिल्लाते हुए बताकर बेवकूफ बनाया जा रहा है की, यह सब दकियानूसी बाते स्वीकार करने वाला व्यक्ति देशभक्त है। मतलब बीजेपी सरकार या मा.पंतप्रधानजी जो कहेंगे उसका स्वीकार करनेवाला ही “देशभक्त” होता है। फिर चाहे वो देश के लिए कितना भी गलत साबित क्यों न हो।

जैसे की हम जानते है, इस सरकार ने कोई भी नियोजन किए बगैर ही अचानक से डिमॉनीटायजेशन (नोट बंदी)  का निर्णय लिया और उस वजह से सभी लोगों का काफी नुकसान हुवा। और जो लोग इस गलत निर्णय का विरोध कर रहे थे। तो ये सरकार जनता को Manipulate करने के लिए सियाचिन मे जवान दिन रात लढ़ रहे है, और हम सिर्फ पैसे निकालने के लिए कुछ घंटे एटीएम के लाइन मे खड़े नहीं हो सकते। इस तरह से नागरीको के देशभक्ति पर सवाल उठाया जाता है। और फिर हमारी जनता इस सरकार को अपनी देशभक्ति साबित करने के लिए सवाल नहीं करती।

जब कुछ जागृत युवा या विद्यार्थी देश के हित मे इस सरकार के तानाशाही का या गलत निर्णयों का विरोध करते है। तो यह सरकार उन्हे देशद्रोही कहती है। इतना ही नहीं अब तो सरकार से इन जागृत नागरिकों को लिए  ‘अर्बन नक्षल’ बोलने का ट्रेंड चल रहा है। और दूसरी तरफ जो लोग देश मे धर्म के नाम पर द्वेष फैला रहे है, पर सिर्फ वो बीजेपी के समर्थक होने के वजह से उन्हे देशभक्त कहा जाता है। डॉक्टर काफ़िल जैसे जिम्मेदार डॉक्टर ने बहुत से बच्चों की जान बचाई, पूरे ईमानदारी से अपनी जिम्मेदारी निभाई थी। उसके बदले मे उनको इस सरकार ने अवार्ड से सम्मानित करने की जगह पर झूठे चार्ज लगाकर जेल मे बंद कर  दिया। आगे जाकर बीजेपी सरकार ने डॉक्टर काफ़िल हिन्दू मुस्लिम मे द्वेष पैदा कर रहे है, देश के सिक्युरिटी को खतरा है ऐसे आरोप लगाकर NSA (National Security Act) के तहत फिर से जेल मे कैद किया और जनता के सामने  उन्हे देशद्रोही साबित किया। जब की वो सच्चे देशप्रेमी है।

हम जानते है CAA और NRC यह कानून नागरिकों के हित मे नहीं है। इसकी वजह सिर्फ हिन्दू मुस्लिम मे द्वेष बढ़ेगा। इस कानून का पूरे देश मे जनता विरोध कर रही है। फिर भी यह सरकार जबरन यह  कानून लागू कर रही है। और जो इसका विरोध कर रही है उसे देशद्रोही बताकर जेल मे बंद कर रही है। और इस कानून का कुछ लोग समर्थन कर रहे है उनको देशभक्ति का खिताब दिया जाता है।

हमारा देश ‘धर्मनिरपेक्ष’ है मतलब की देश का कोई धर्म नहीं और देश कोई एक धर्म को बढ़ावा नहीं देगा। देश के लिए सभी धर्म समान है। फिर भी यह सरकार इस देश को ‘हिन्दू राष्ट्र’ बनाने का संकल्प कर चुकी है, जो की संविधान विरोधी है। जो लोग इसका विरोध करते है, तो उन लोगों को भी देशद्रोही बताया जाता है। और जो इसका समर्थन करते है, उनको देशभक्त कहा जाता है। शायद हम अबतक समझ ही गए होंगे। अबकी देशभक्ति की व्याख्या बीजेपी सरकार तय कर रही है। इनके हिसाब से सिर्फ जो सीमा पर लढ़ रहे है वो देशभक्त और जो इनका समर्थन करते है वो देशभक्त। इन लोगों को छोड़कर बाकी पूरी जनता देशद्रोही है।

मेरे नजरिये मे भक्ति किसी भी चीज की हो अंत तक वो गलत ही साबित होगी। चाहे फिर वो धर्म की हो, देश की हो, किसी राजनैतिक पार्टी की हो, या किसी व्यक्ति की! क्योंकि जब हम भक्त बन जाते है, तो हम हमारे विवेक बुद्धि का उपयोग करना छोड़ देते है। किसी भी चीजों पर , बातों पर या व्यक्ति पर अंधविश्वास रखते है। उसको किसी भी तरह खुद जाँचते नही। मेरा सभी देश के नागरिकों को आवाहन है की, हमे किसी भी पार्टी के नेता के झांसे मे आना नहीं है। उनकी भक्ति नहीं करनी है। हमे हर बात को अपनी विवेक बुद्धि का उपयोग कर किसी पर भी अंधविश्वास रखे बगैर जाँचना पड़ेगा, परखना होगा और देश के विकास के लिए जो काम करे उसका समर्थन करना होगा, न की मंदिर मस्जिद , धर्म-राष्ट्रवाद की बात करने वाले का। और कोई भी हमे अपनी देशभक्ति साबित करने के लिए कहे तो कोई जरूरत नहीं किसिको भी साबित करके दिखाने की। और हमे इनको सवाल करना होगा, मेरा देश के प्रति देशप्रेम है या नहीं इसका परिमाण पूछने वाले तुम होते कौन???

 

~ विशाल पुष्पा पद्माकर जाधव

           (सीपीडी साथी)

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