लॉकडाउन और  बेरोजगारी

लॉकडाउन से पहले :–  लोगों का शहर में रोजगार के लिए आना जाना लगा रहता था। गरीब हो या अमीर हो लोग घर में बैठते नहीं थे। छोटे से छोटे बड़े से बड़े लोग रोज काम करते। दिन रात बस, ट्रेन, रिक्शा,दुकान,होटल, अस्पताल,स्कूल,कॉलेज सब कुछ चालू रहता था। लोग खुली साँस ले रहे थे । दिन भर देश चालू रहता था । लोग अलग अलग देशो से सिर्फ रोजगार के लिए आते है। गांव से शहर और शहर से गांव आते जाते थे । बहुत से मजदूर अपना परिवार का पालन पोषण करने के लिए अपने परिवार से दूर काम धंधे के लिए आते थे, और काम करके पैसे कमा कर सालो बाद अपने परिवार से मिलने जाते थे। देश हमेशा चालू रहता था। किसी ने भी कभी सोचा नहीं होगा की, हम सब इस खतरनाक दौर से गुजरेंगे। जब हमारे देश मे भी कोरोना महामारी का वायरस फैलने लगा। पूरी दुनिया के साथ साथ हमारा जीवन और हमारा जगमगाने वाला देश एकदम से ठप हो गया! हमारे जीने का तरीका एकदम से बदल गया जब अपने देश मे भी लॉकडाउन चालू हुवा।

 

लॉकडाउन में :-  लॉकडाउन की शुरुआत कोरोना महामारी के कारण हुई है। कोरोना महामारी की शुरुआत २०१९ में चीन के एक छोटे वुहान शहर से हुयी। धीरे-धीरे हर देशो में कोरोना वायरस फैल कर कोरोना पॉजिटिव मरीजो के आंकड़े बढ़ने लगे। लाखों लोग मरने लगे। जिसके कारण सरकार ने अपने देशों मे कोरोना महामारी फैलने से रोकने के लिए लॉकडाउन का एक जरिया बनाकर अपने-अपने देश मे लागू किया। २२ मार्च से देश मे लॉकडाउन की शुरुवात हुयी। दुनिया जैसी ठप सी हो गई। एकदम से बंद हो गई! लोग अपने घरों में बंद हो गए! काम -धंधे बंद हो गए! लॉकडाउन में रेलवे, बस , टैक्सी , ऑटो सब बंद हो गए। लोगों का बाहर निकलना मुश्किल हो गया। लोग अपने ही घर मे बंद हो गए, जैसे परिंदे पिंजरे मे बंद होते है। सभी के  काम-धंधे छूट गए। लोगो का पगार आना बंद हो गया। जो लोग काम पर जा रहे थे, उनको काम से निकाला गया।

कोरोना महामारी के वजह से बहुत से लोग बेरोजगार हो गए। लोग एक दूसरे से मदद मांगने लगे। कोई ब्याज से कर्जा निकालने लगा, कोई गहने बेचने लगे, कोई रोज दुकान से उधार सामान लेकर जी रहा था। लॉकडाउन के कारण बेरोजगारी इतनी बढ़ गई कि लोग भूखे मरने लगे । एक टाइम का खाना कहा से मिल जाए यह लोग सोचते थे।  बहुत से लोग भूखे सो जाते थे अपने परिवार के साथ। रास्ते पे रहने वाले लोग कचरे के डिब्बे से निकालकर खा रहे थे । बोहोत से घरो में एक वक़्त का चूल्हा जलता था। पूरी रात भूखे सोना पड़ता था। बहुत से लोग पानी पी कर गुजारा कर रहे थे। लॉकडाउन में लोगों की हालत इतनी बदतर हो गई थी। बोहोत से लोग आत्महत्या करने की सोच तक पहुँच गए। लोग भुखमरी से मरने लगे थे।

लॉकडाउन और भुखमरी के वजह से न मर जाये इस सोच को लेकर कुछ मजदूर साथियों ने अपने अपने गाँव जाना तय किया। पर रेल गाड़ी, बस,टैक्सी ,ऑटो की सुविधा न होने कारन मजदूर साथियों ने पैदल चल कर गाँव जाना तय किया। सभी मजदूर मध्यप्रदेश के थे। और जालना में स्टील कंपनी में काम करते थे। औरंगाबाद से 40 किलोमीटर चलकर पैदल जा रहे थे अपने गांव मध्यप्रदेश। सड़क से चलकर घर जा रहे ,थे तो पुलिस रोक रही थी। इस वजह से वह मजदूर रेलवे पटरियों से चलकर अपने गांव जा रहे थे। चलते- चलते थक गए,अंधेरा भी काफी हुवा था। लॉकडाउन के कारण ट्रेन बंद है यह सोच कर   सभी साथी पटरियों पर सो गए। और फिर अचानक से मालगाड़ी उसी पटरी से गुजरकर उनके ऊपर से चली गई। इस हादसे मे 16 मजदूरों की मृत्यु हो गई। शुक्रवार 8 मई को यह हादसा हुआ। बेरोजगारी और भुखमरी के कारण लोग अपने अपने शहरों और गांव कई किलोमीटर चलकर जाने लगे। मजदूरों को मुंबई में खाना और काम नहीं। तो वो लोग पैदल चलकर अपने अपने गांव जाने लगे।  लोगों को यह लगा कि वह भूखे मरने से अच्छा अपने परिवार के साथ रहेंगे और उधर मर जायेंगे। जो लोग मेहनत करके खाने वाले थे उनके ऊपर बेरोजगारी के कारण भीख मांगने की नौबत आ गई थी। काम -धंधे बंद होने के वजह से लोगो का मानसिक तनाव बढ़ गया। काम -धंधे न होने के कारण लोगो को गुस्सा आने लगा। लोग अपने घरों में झगड़ा करने लगे मारपीट करने लगे। घरो में पति – पत्नी में  झगड़ा होने लगा मारपीट होनी लगी। लॉकडाउन और बेरोजगारी के वजह से घरेलू हिंसा (Domestic Violence) ज्यादा बढ़ने लगा।

१९ मई मंगलवार बांद्रा टर्मिनस से मजदूरों को गांव जाने के लिए ट्रेन निकलने वाली है ऐसा कॉल उनके  नियर पुलिस स्टेशन से आया था। पर अफसोस  यह सिर्फ अफवा थी। जिसके वजह से मजदूर बान्द्रा टर्मिनस के बाहर सुबह से भीड़ लगा के खड़े थे। लेकिन कोई ट्रेन नहीं छुटी! भीड़ ज्यादा होने के वजह से पुलिस मजदूरों के ऊपर लाठी चार्ज करने लगी। लोगो को भगा – भगा के मार रही थी। फिर मजदूरों ने भी  स्टेशन के बाहर  बैठ के नारे बाजी और आंदोलन करना शुरू कर दिया।   लॉकडाउन और बेरोजगारी के कारण लोगों की यह स्थिति हो  गई थी। लेकिन सरकार सही तरीके से फैसला नहीं ले पा रही थी। सरकार लोगो को सही तरीके से राशन मजदूरों को खाना नहीं पहुंचा पा रही थी।  सरकार लोगो को सही तरीके से सुविधा नहीं दे पा रही थी । लॉकडाउन के कारण आफिस में काम करने वाले लोग दिहाड़ी काम करने लगे है।  काम न होने के वजहसे अच्छे – अच्छे  जगहों पर काम काने वाले लोग दिहाड़ी काम करके अपना परिवार संभाल रहे है।। । बोहोत से गांव में शिक्षक काम न होने के कारण मनरेगा (MANREGA -महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंट अधिनियम) का काम करके अपना गुजारा कर रहे है। करोड़ो लोग लॉकडाउन के वजहसे बेरोजगार हो गए है।करोड़ो लोगो के नौकरियो पर काले बादल मंडरा रहे है। सेंटर फॉर मॉनिटरिंग इंडियन  इकनॉमी (सीएमआईई) ने  कहा है कि, कोविड-19 लॉकडाउन के चलते देश मे बेरोजगारी की दर 24 मई के सप्ताह के दौरान बढ़कर 24.3 फीसदी रही। पिछले सप्ताह बेरोजगारी की दर 24.01 फीसदी थी। मार्च में बेरोजदारी दर 8.8 थी। कोरोना वायरस का असर भारत की अर्थव्यवस्था पर हुआ। लोग बेरोजगार हो चुके है।

अब अनलॉकडाउन की प्रक्रिया जारी है, लेकिन इसका सीधा असर भारतीय अर्थव्यवस्था पर पड़ता नजर आ रहा है। इस बीच आरबीआई ने एक और चिंताजनक खबर दी है, भारतीय रिजर्व बैंक के एक अधिकारी ने कहा की चालू वित्त वर्ष की दूसरी तिमाही यानी जुलाई से सितंबर में देश की जीडीपी एक साल पहले की तुलना में 8.6 प्रतिशत अनुमान हुआ। देश मे अनलॉक हुआ है फिर भी बेरोजगारी अभी भी कम नहीं हो रही है। सरकार को सही से नीतियां बनानी चाहिए, जिससे हमारी अर्थव्यवस्था फिर से सही होकर सबको रोजगार मिल पाए।

 

~ रुकसार  खान

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