#हमारा_आत्मा_हमारा_संविधान

देश के हर व्यक्ति को महत्व दिया उसने, लोगों के बीच के अंतर को मिटा दिया उसने,

धर्म जाती की असमानता को  खत्म किया उसने, कानून के सामने सभी को समान बनाया उसने,

छोटे से लेकर बड़े तक सभी को अधिकार दिया उसने,

सभी में भाईचारे का भाव जगाया उसने…

देश पर कोई दबाव नहीं होगा और वह पूरी तरह से मुक्त होगा यह सोचा है उसने।

समाजवाद मूल्य को अपनाकर, आमिर और गरीब के बीच के अंतर को मिटाने का मार्ग दिया उसने।

देश की सरकार धर्मनिरपेक्ष होगी और,

देश को लोकतंत्रात्मक गणराज्य के रूप में बनाया जाना चाहिए यह ऐलान किया है उसने…

हर व्यक्ति को सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक न्याय दिया उसने,

भाषण हो, गीत हो, नाटक हो, लेखन हो, सभी को अभिव्यक्त होने का अधिकार दिया उसने…

विचार, विश्वास, श्रद्धा और उपासना मतलब अपने धर्म की पूजा करने, दूसरों के धर्म की पूजा करने और किसी भी धर्म की पूजा न करने की स्वतंत्रता का अधिकार दिया उसने…

प्रतिष्ठा और अवसर की समानता हर एक व्यक्ति को मिले इसलिए इंसान होने के नाते सबको महत्व दिया उसने. 

राष्ट्र की एकता और अखंडता बनी रहे, हर एक व्यक्ति एक दूसरे के साथ सद्भाव से रहे इसलिए लोगों में भाईचारे का भाव जगाया उसने,

आप सब के सामने यह सवाल आया ही होगा की ऐसा कौन है जो यह सब हमें प्रदान करता है?

वो कोई और नही, वो हमारा भारतीय संविधान है, हमारा स्वाभिमान है।

जो हम सबका आत्मसन्मान है

हम सबने उसे २६ नवंबर १९४९ को खुद को समर्पित किया है।

संविधान हम सब की आत्मा है। 

इसलिए कहती हु की….

नागरिक होने के नाते हम सबकी एक ही जिम्मेदारी… 

चलो उठो,

संविधान को समझो, इसे अपनाओ और इसके मूल्योंको घर घर पोहोचाओ…

– एड्. अनुराधा नारकर

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