शीघ्रपतन – एक सार्वजनिक कामुक कथा।

राजा हमेशा संवाद में कहता था, वो भिकारी था। 

लेकिन जब भी जनता अपनी गरीबी की बात करती तब वह क्षणिक भिकारी बन जाता। गरीब जनता राजा की मार्मिक फकीरी सुन के भावुक हो जाती और अपने दीन- दुखी जीवन पर खुश होने लगती। 

लेकिन महंगाई के बढ़ते सवाल जब ज़्यादा उठने लगे और महामारी ने भी दस्तक दी , तब लोग मरने लगे और राजा अपने महल में अपनी गरीबी का अभ्यास करने लगा। 

जब गरीबी और फकीरी काम न आयी तो राजा ने रोना शुरू कर दिया और जनता जो पहले राजा की फकीरी सुन के रोती थी अब परेशान हो गयी कि राजा के रोने पर क्या प्रतिक्रिया दे। 

राजा हर बार जन संवाद में रोने लगा और जनता शीघ्र माफ करने लगी, जिसके चलते जनता शीघ्रपतन का शिकार हो गयी। 

शीघ्रपतन के चलते जनता के वैवाहिक और फिर पारिवारिक जीवन पर असर पड़ने लगा। जनता गरीबी और महामारी से परेशान थी ही, अब मानसिक दबाव के चलते रिश्ते बिगड़ने लगे और कइयों के घर बर्बाद हो गए।

तब राजा ने नगर में ढिंढोरा पिटवाया और जन संवाद में आत्मनिर्भरता का नारा दिया।

अब नगर में खुशफहमी का माहौल है; सारी जनता हस्तमैथुन में लगी है और नगर के हर घर आत्मनिर्भर बन गए।

~रिझवान चौधरी

 विभाग – मुंबई 

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