पानी और इसका निजीकरण…

             पानी हम सबके जीवन का एक अभिन्न अंग है, और इसके बिना जीने की कल्पना भी नहीं की जा सकती! पानी का न कोई रंग होता है और नहीं कोई स्वरुप, ये हम सभी को प्रकृति के द्वारा एक विरासत के रूप में मिला है!

          आज देश को आज़ाद हुए 70 साल हो चुके हैं और आज़ादी के बावजूद भी पानी की किल्लत दूर नहीं हुई है। आज भी समाज का एक ऐसा तपका है जिसे घंटो मीलों दूर पैदल चल कर पानी भरने के लिए जाना पड़ता है। उन्हें ना जाने कितने लोगों द्वारा गाली गलौच सुन कर ज़लील होकर पानी भरने के लिए मशक्कत करना पड़ता है। पानी के टैंकर का भी लम्बा इंतज़ार करना पड़ता है। आज कल कुछ प्राइवेट कंपनियां भी हैं जिन्हे सरकार का सहयोग प्राप्त है और वो मनमर्जियां करते हैं, लोगों को कई बार सप्ताह भर पानी नहीं मिलता और वो पानी को स्टोर करके रखते हैं ताकि घर में ज़रूरत के समय उसका इस्तेमाल कर सके। क्या ग्रामीण क्षेत्र और क्या शहरी क्षेत्र हर जगह पानी की मारामारी है। कुछ लोग तो पानी पीने के लिए लाइन में भी खड़े रहते हैं, यह आस लिए कि कब उनका नम्बर आएगा कि वो पानी पीये।

          आज  सरकार के कुछ गलत नीतियों की वजह से पानी का निजीकरण हो रहा है ,और सरकार उन्हें प्राइवेट कंपनियों के हाथ में सौंप रही है। आज गांव के कई हिस्से में पीने के लिए पानी उपलब्ध नहीं है। इसका मुख्य कारन यह है कि, ज़मीनो का अधिग्रहण होता जा रहा है, प्राइवेट कंपनियां अपनी मनमर्ज़ी से वहां अवासीय कॉलोनी बना रही है, झिल, नदियां और तालाबों को दूषित किया जा रहा है, यहाँ तक कि उन्हें जर्जर हालत में छोड़ कर उसके अस्तित्व को ख़त्म कर रहे हैं। आज जल स्तर इतना गिर चूका है कि पीने के लिए पर्याप्त पानी भी मुश्किल से नसीब होता है। जाने कब सरकार जागेगी और पानी की किल्लत से छुटकारा दिलाएगी। आज बहुत ज़रूरी है कि पानी का निजीकरण रोका जाये, उन्हें देश के सभी नागरिकों को एक पर्याप्त दर पर उपलब्ध कराया जाये। ताकि कोई भी प्यासा ना रहे और सभी को पानी मिल सके, जो उनका मौलिक अधिकार है।

             आज प्रकृति भी हमसे नाराज़ है और वक्त बेवक़्त कभी सूखा तो कभी बाढ़ जैसी उत्पन्न हो रही है। जिसका कारन यह है कि हमने जंगलों की कटाई शुरू कर दी है, जिससे पानी का बहाव रूक सा गया है और पानी धरती में ना जाकर कहीं एक जगह सिमट कर रह गया है, और यही कभी बाढ़ तो कभी प्राकृतिक आपदा का कारन बनती है। आज ज़रूरी है कि पानी की कालाबाज़ारी और इसके निजीकरण पर सख्त रोक लगाई जाये और जो नदियां, झीलें तालाबें ख़त्म होने की कगार पर है उन्हें फिर से पुनर्जीवित किया जाये ताकि पानी का सही प्रबंधन हो सके और हर घर को पीने योग्य पानी मिल सके.                                                                                                                                                                                     

(सुजीत अनुराग)

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