आज की नारी कैसी है, फूल नही चिंगारी है….

में हु आज की नारी,

मुझमें बसी है दुनिया सारी,

ना रही में पहले वाली बेचारी,

बदलतें वक़्त के साथ,

मुझमें आयी समझदारी,

में हु आज की नारी….

 

लड़किया किसी बाग़ का खूबसूरत फूल नही है, जिसे कोई भी कभी भी तोड़ ले। लड़किया तो चिंगारी की तरह है, जिसे छूने से छेड़ने वाला डर जाये। लड़कियों को चाँद की तरह खूबसूरत नही, बल्कि सूरज की तरह रोशन होना चाहिए। जिसे कोई घूर ना सके।

 

  में वो चाँद नही जो सिर्फ खूबसूरत नजर आए,

     में वो हु जिस मे सच्चाई की सूरत नज़र आए,

     में कल्पना, में गीता और में हु सावित्री,

     जमाने को मुझमें सिर्फ ममता की मूरत नज़र आए…

 

आज की नारी घर मे ही नही बल्कि देश के बॉर्डर पर भी है। आज की नारी जमीन पर ही नही बल्कि चाँद पर भी है। आज महिलाएं सती प्रथा में पती के साथ जलने वाली नही है, बल्कि पती के साथ कंधे से कंधा मिलाकर चलने वाली है।

 

आज महिलाएं अदालत मे भी है, जहा जीवन मिलता है, उस हॉस्पिटल में भी है। अब घूँघट मे मुँह छुपाए नही, बल्कि गर्व से सर उठाये चलती है महिलाएं! पर कुछ लोग महिलाओं को सिर्फ  घर मे रखना चाहते है। लड़किया ठीक से बड़ी भी नही होती, उसे घर के कामकाज में लगा देते है। उन्हें लगता है, शादी एक वही मक़सद है, लड़कियों की ज़िंदगी का! कुछ लोगो की सोच होती है, की लडकिया ज्यादा पढ़ नही सकती, लडकिया आगे बढ़ नही सकती, लडकियों को उनकी पहचान शादी के बाद ही मिलती है, वगैरा वगैरा लैकीन, लोगों को ये क्योँ समझ नही आता के अगर हिंदुस्तान की सारी लडकिया पढ़-लिख कर काम करे तो हमारा हिंदुस्तान ज्यादा कामयाब होगा। और इस तरह लड़के पर घर की सारी जिम्मेदारी नही रहेगीं। अगर पती-पत्नी दोनों कमाए तो घर चलाना बहुत आसान होगा। और next generation को अच्छी ज़िन्दगी मिल सकती है। इस तरह पूरा देश आगे बढ़ेगा।

 

 

की & का मूवी आपने देखी होगी। वो आज के दौर की सच्चाई है। आज तो पती घर मे रहता है, और पत्नी बाहर जा कर काम करती है। पती भी घर के काम कर सकता है, और पत्नी भी बाहर के काम कर सकती है। कुछ लोग लड़कियों को कमज़ोर समझते है, हम उनकी सोच से भी आगे है। आज लड़कियां boxing में कुश्ती में बहुत आगे है।

 

बिते हुए काल मे जो महिलाओं के साथ अन्याय हुवाँ, आज उस अन्याय की चिंगारी है हम में। जैसा सती प्रथा ,बालविवाह, लड़कियों को अनपढ़ रखना, दहेज लेना।

 

पती के साथ जला दिया गया था, आज उस अन्याय की

चिंगारी है मुझ में।

नासमझ, अनपढ़ समझने की भूल न करना, पूरी दुनिया की जानकारी है मुझ में।

 

~ सलमा खान

   विभाग-मुंबई

 

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