तुम्हे हैं, “स्वतंत्रता का अधिकार!”

नारी तुम सिर्फ मनोरम नही हो।
तुम्हें भी है , विकसित होने का समान अधिकार।

तुम्हें भी प्राप्त है संविधान के मूल्यों का एक समान अधिकार।
तुम वो प्रकृति हो जिससे होता लोगों के जीवन का उद्धार।

नारी तुम सिर्फ मनोरंजन का द्वार नही हो।
तुम्हें भी है , जीवन जीने का अधिकार।

तुम हो शक्ति की पूजा। फिर क्यों होता अपमान तुम्हारे वजूद का।
तुम हो झाँसी की ऊर्जा । फिर क्यों होता हैं समापन तुम्हारे वर्चसप का।

नारी तुम सिर्फ साधन नहीं हो।
तुम्हें भी है, खुले आसमान में उन्मुक्तता का अधिकार।

तुमने देश के कानून की रचना को एक माला में पिरो डाला ।
तुमने देश के व्यापक राजनीतिक व्यवस्था के डोर को संभाला।
तुमने देश के कई लोगों की सहयोनी बनकर सेवा कर डाला।
तुमने देश के कई संगीतों के स्वरों से सवार कर रूहानी बना डाला

नारी सिर्फ तुम उपहार नही हो।
तुम्हें भी है, स्वतंत्रता का अधिकार।

इशाद शेख…

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